अलीगढ़ : शादी की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का पूरा भुगतान लेने के बावजूद ग्राहक को तय सेवाएं उपलब्ध नहीं कराना एक फोटोग्राफर को भारी पड़ गया। अलीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए फोटोग्राफर को शादी समारोह से जुड़ी सभी फोटो, वीडियो और प्रिंटेड एलबम शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए एक लाख रुपये का हर्जाना भी देने को कहा गया है।
मामला अलीगढ़ के दुबे का पड़ाव निवासी पल्लवी मोहन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर कर बताया था कि उन्होंने 19 मई 2022 को दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित मोंक वीडियो के संचालक रवि मदन से अपनी शादी के कार्यक्रम की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए अनुबंध किया था।
समझौते के अनुसार, 8 दिसंबर 2022 को ईडन गार्डन मैरिज हॉल में आयोजित विवाह समारोह की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जानी थी। इसके अलावा कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग और तस्वीरों के आधार पर प्रिंटेड वेडिंग एलबम तैयार कर शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराया जाना था।
पल्लवी मोहन के मुताबिक, उन्होंने इस पूरी सेवा के लिए फोटोग्राफर को 1.20 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद शादी समारोह की फोटो और वीडियो उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए। साथ ही प्रिंटेड एलबम भी तैयार कर उन्हें नहीं सौंपा गया। शिकायतकर्ता ने फोटोग्राफर से कई बार संपर्क कर अपनी तस्वीरें, वीडियो और एलबम देने का अनुरोध किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने विपक्षी रवि मदन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया। हालांकि, आयोग के मुताबिक वह किसी भी सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए और न ही अपना पक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद आयोग ने मामले की एकपक्षीय सुनवाई की और उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया।
आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने कहा कि उपभोक्ता से सेवा की पूरी रकम लेने के बाद भी निर्धारित सेवाएं उपलब्ध नहीं कराना सेवा में कमी और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
आयोग ने फोटोग्राफर को निर्देश दिया कि वह विवाह समारोह से संबंधित सभी फोटो, वीडियो और प्रिंटेड एलबम शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराए। इसके अलावा मानसिक कष्ट और असुविधा के लिए एक लाख रुपये का हर्जाना भी अदा करने का आदेश दिया गया है।
आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों की समय-सीमा तय की है। आदेश का पालन नहीं होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें कारावास सहित अन्य कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें भुगतान के बावजूद सेवा प्रदाताओं से तय सेवाएं नहीं मिलती हैं।

